Tuesday, April 6, 2010

mister gogo - bhagat singh ka bhut

सुनो सुनो दुनिया के लोगों
इनका नाम है मिस्टर गोगो
आइये आपको इनके कारनामे बतलाएं
ताकि आप हस्ते हस्ते फुले न समायें
गोगो के बारे मैं देता हूँ मैं आपको एक जानकारी
15  अगस्त को आता है उनका जन्मदिन
जिस दिन मनाती है स्वतंत्रता दिवस भारत की जनसँख्या सारी
हर बार की तरह इस बार भी गोगो के घर मैं चल रही थी पतंगबाजी
पर गोगो पतंग उड़ा के न था राज़ी
चाचा रफीक और उसके पिताजी चाचा छत पर कर रहे थे मस्ती
उड़ा रहे थे पतंगे जो थी बहुत सस्ती
बड़ा बुलाया गोगो को की "आके उड़ा ले पतंग "
पर गोगो देख रहा था THE LEGEND OF  BHAGAT  SINGH अपने दोस्तों के संग
उसके सर पे सवार था देशभक्ति का जूनून
"इन्कुएलाब जिंदाबाद" के नारे लगा के मिलता उसको बड़ा सुकून
फिल्म ने किया उसके दिमाग पे ऐसा असर
कसम खाली  उसने की देश को सुधारने मैं वो छोड़ेगा नहीं कसर
प्रण किया उसने की जन्मदिन पर करेगा वो एक अच्छा काम
अच्छा काम करके कमाएगा अपने लिए अच्छा नाम
परन्तु उसकी छोटी सी बुधि कोई काम न सोच पाई
तभी उसे अंधे गोरो की याद आयी
गुलक से पैसे लेके ज्यों ही पहुँच गोरो के पास
इरादे उसके हों गए चूर चूर और वोह हों गया हताश
उसके दिल को लगा बड़ा ज़बरदस्त झटका
मानो दे मारा हों उसके सर पे किसी ने मटका
गोरो पहन के सूट बूट और टाई
अपनी बेटियों के संग अ रहा था खाते हुए मिठाई
धंधे से गोरो था तो भिकारी
पर समझना मत उसको अनारी
PHD होल्डर था subject था chemistry
मौका मिला तो बदल सकता था दुनिया की history
पर आज उसे मिल गयी थी अछी नौकरी
गोगो ये सब जानकार रह गया हैरान
रोना आया अपनी किस्मत पर उसे
और फिर से जाग गया उसके अन्दर का शैतान
झट से उतर गया भगत सिंह का भूत उसके सर से
और हर बार की तरह फिर से पकडे उसने अपने कान
इन्केलाब जिंदाबाद का नारा लगा के करता हूँ यह कविता बंद
जाते जाते कहूँगा वन्दे मातरम और जय हिंद
                                                                     -  17 /08 /03
                                      

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