Monday, March 8, 2010

mister gogo - jungle main

सुनो सुनो दुनिया के लोगों
इनका नाम है मिस्टर गोगो
आइये आपको इनके कारनामे बतलाएं
ताकि आप हस्ते हस्ते फुले न समायें
यह बात है पुराणी
हाँ हाँ भाई
तब तक मर चुकी थी झाँसी की रानी
greeshm ऋतू बोल रही थी बद्द chad कर
सूर्य देवता ने धाय था कहर
मिस्टर गोगो भी इससे वंचित न रह पाए
गर्मी ने इनके ऊपर भी बहुत कहर तह धाये
मिस्टर गोगो को सुझा एक उम्दा उपाय
सोचा की क्यूँ न जंगल मैं जाके गर्मी बितायी जाए
खोल लिया दुनिया का नक्षा
धुंडने लगे जंगल जो करे इनकी गर्मी से रक्षा
तलाश जंगल की हुई नाकाम
सर मैं दर्द हुआ इतना की लगनी पड़ी बाम
हार उसने कर ली थी स्वीकार
सफलता ने पास आने से कर दिया था इनकार
एक दिन घर मैं स्कूल से नोटिस एक आया
दिल मैं उनके खुशिया वोह लाया
लिखा था उसमे
गर्मी की चुटिया हामरे संग मनाये
आइये जंगल मैं मौज मनाये
३०० रुपैये जमा करा के
अपना नाम दर्ज कराएं
गोगो की ख़ुशी का न रहा ठिकाना
आखिर हों जो गया उसे नसीब जंगल मैं जाना
३ दिनों के कपडे किये उसने बंद
पहुँच गया स्कूल अगले दिन खता हुआ कलाकंद
यह ख़ुशी थी ख्संभंगुर
टूट गयी जब मिला उसका मित्र मधुर
मधुरता से भरपूर नूर से भरा हुआ उसका चेहरा
मधुर था उदास
गायब था उसका हर्षो उलास
पूछ ताछ के बाद बात ये सामने ई
की कलनाद के रूप मैं जो गोगो ने खाई थी मिठाई
उसका समय था नहीं सुबह के ८ बजे
बल्कि था गुफारी के २ बजे भाई
यह जानकार गोगो को लगा धक्का
उड़ गए उसके होश रह गया वोह हक्का बक्का
२ बजे की पकड़ी उसने बस
पहुँच गया जंगल मैं जब बजे  सवा दस
जंगल मैं क्या देखता है वोह बेचारा प्राणी
की उसकी आँखों के सामने खड़ी है उसकी नानी
नानी के संग छुटियाँ बनाने का तो न था उसका इरादा
पर बेचारे की किस्मत ही है ख़राब औरों से थोड़ी ज्यादा
नानी और मचरों ने कर दिया उसका जीना ख़राब
देखेगा नहीं वोह कभी जंगल के ख्वाब
तीन दिन के जहनुम के बाद
घर जब वोह वापिस आया
तो परिवार जानो कियो बेहद खुश पाया
उस दिन गोगो को बेहद रोना आया
और पछताया
की क्यूँ वोह जंगल के झांसे मैं आया
दरसल
हुआ ये की गोगो के जाने के बाद
बरखा रानियों को दिल्ली वासियों पे तरस आया
और उसने जम कर पानी बरसाया
गर्मी से बचने के लिए गोगो गया था जंगल
jungle मैं हों गए दंगे
दिल्ली मैं हों गया मंगल
गोगो ने फिर पकडे अपने कान
जैसे दाल मखानी बिना बुट्टर नान
तो हर अची चीज़ का आता है अंत
यह मैं नहं कहता कहता था कोई महंत

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